बहुत खलता है खालीपन इस सीने में,
दिल में रखूँगा जज़्बात अपने,
तेरे नर्म बदन की गर्म छाँव तले,
कुछ ख़लिश हो सीने में,
तेरे इश्क से रोशन रूह मेरी,
ख़्वाबों के फर्श पर,
बिखरी बिखड़ी सी थी मेरी ज़िन्दगी,
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राजीव झा
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कुछ तुम कहो कुछ हम कहें,
ये फासले यूँ ही कम करें,
कुछ तुम कहो कुछ हम कहें,
अब दरम्यान न कोई गम रहे.
जब जब गम के बादल बरसे,
क्या दोगे मेरा साथ?
तेरा ही था, तेरा ही हूँ,
क्यूँ सोचे ऐसी बात....
तुम बिन धड़कन सूनी सी है,
सीने पर रख दे हाथ,
आ लग जा सीने से तू,
दे दे हाथों में हाथ...
मेरे ग़म से रोई धरती,
देखो ये ओस की बूँद,
आ बस जा नयनों में तू,
आँखों को लूँ मैं मूँद...
तेरे इश्क से रौशन रूह मेरी,
बिखड़ी खुशियों की धूप,
साथ मेरे जब तक है तू,
मैं हूँ ग़म से महफूज़...
बिन देखे बेचैन रहूँ,
देखूँ तो आये सुकून,
चाहूँ खुद से ज्यादा तुझको,
तेरा इश्क नचाए खूब...
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राजीव झा
the day changed
only on the paper calendar
one more day
turned away offended
exactly what
I had feared
happened today
today again,
nothing happened
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Anonymous
जब लगा की थक कर हुआ चूर,
पथ मेरा मुझसे हुआ दूर,
हर काम रुका, पाथेय चूका,
थी यही नियती, अति कठिन- क्रूर;
अब कहीं किसी कोने में जा,
करना होगा कहीं ओढ़,
वे दीन हीन से जीर्ण वसन;
तब देख रहा यह चकित आज,
तेरी लीला का नहीं पार,
फिर धार उमर आई कोई,
मुझमे बहती नूतन बयार;
जब गई पुरानी भाषा मर,
नव गीत उठे छाती में भर,
जब पूरा हुआ पुराना पथ,
आये नव प्रांतर,क्षितिज उभर..
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रविन्द्र नाथ ठाकुर
"Don't be reckless with anyone's heart
and...
don't put up with those..
who are reckless with yours."